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मलक्का जलसंधि और वैष्विक व्यापार की दुविधा – कर्नल डाॅ. भारत भूषण वत्स (से.नि.)

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मलेषिया के मलक्का बादषाही के नाम पर, मलेषिया और इंडोनेषिया के सुमात्रा द्वीप के मध्य स्थित मलक्का जलसंधि आजकल सुर्खियों में है। हिंद महासागर से दक्षिण चीन सागर होकर प्रषांत महासागर को जोड़ने वाली यह तंग जलसंधि 1.7 समुद्री मील चैड़ी और 550 समुद्री मील लम्बी है। चीन के अतिरिक्त दक्षिण चीन सागर में स्थित ताईवान, फिलिपिंस, मलेषिया, ब्रुनेई, इंडोनेषिया, सिंगापुर और वियेतनाम के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया और वैष्विक व्यापार के लिए भी मलक्का जलसंधि महत्वपूर्ण है।

चीन दक्षिण चीन सागर के सभी तटीय देषों के अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री अधिकारों को दरकिनार करते हुए, दूसरी शताब्दी के हुवान राज्य का हवाला देते हुए, अपने मानचित्रों में नाइन-डेष लाईन दर्षाकर, पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना आधिपत्य मानता है। अगर चीन अपने इस इरादे में किसी तरह से कामयाब हो जाता है तो विष्व के लिए कितनी बड़ी आर्थिक और राजनैतिक समस्या उत्पन्न हो जायेगी, यह सोचने का गम्भीर विषय है।

malacca strait

मलक्का जलसंधि और दक्षिण चीन सागर

दक्षिण चीन सागर की अहमियत इस क्षेत्र में पाये जाने वाले प्रचूर प्राकृतिक तेल और गैस संसाधनों, विष्व के तकरीबन 10 प्रतिषत समुद्री जीव जन्तु, इस सागर से तटीय सम्बंध रखने वाले अन्य 7 छोटे देषों की सुरक्षा इत्यादि के अलावा सबसे महत्वपूर्ण कारण विष्व के एक तिहाई समुद्रीय आवागमन का इस सागर से होकर गुजरना है।

लगभग 5.3 ट्रिलियन डाॅलर का वैष्विक व्यापार हर साल यहाँ से होकर गुजरता है उसमें से 1.2 ट्रिलियन डाॅलर सिर्फ अमेरिका के लिए होता है। लगभग 80 प्रतिषत वैष्विक व्यापार समुद्री रास्ते से होता है जिसका 60 प्रतिषत एषिया से होकर गुजरता है। चीन का 64 प्रतिषत, जापान का 42 प्रतिषत समुद्री व्यापार इस सागर से होकर गुजरता है।

यूरोप का चीन के साथ अधिकतर व्यापार साउथ अफ्रिका के केप आॅफ गुड होप के दक्षिण से होकर हिंद महासागर में आता है और मलक्का जलसंधि से होता हुआ दक्षिण चीन सागर में पहुँचता है। चीन ताइवान जापान और दक्षिण कोरिया के लिए दक्षिण चीन सागर विषेष तौर से महत्वपूर्ण है। इस प्रकार विष्व के लगभग सभी बड़े देषों का व्यापार इस क्षेत्र से होकर गुजरता है।

मलक्का जलसंधि और दक्षिण चीन सागर से व्यापार में बाधा विष्व के लिए एक आर्थिक समस्या पैदा कर सकती है। हालांकि दक्षिण चीन सागर में प्रवेष के लिए इंडोनेषिया के सुमात्रा और जावा द्वीपों के मध्य सुन्दा जलसंधि और इंडोनेषिया के लोम्बोक और बाली द्वीपों के बीच लोम्बोक जलसंधि के जरिए दो वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद हैं परंतु मलक्का जलसंधि ही सबसे छोटा, किफायती और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला समुद्री रास्ता है। यह रास्ता कम समय के लिए बन्द होने पर समुद्री जहाजों के पास इंतजार करने के अलावा इन वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने का भी विकल्प है। परंतु लम्बे समय के लिए मलक्का जलसंधि बाधित होने के वैष्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यापार पर और खासकर चीन और दक्षिण पूर्वी एषिया के देषों पर गम्भीर और दूरगामी प्रभाव होंगे।

चीन विष्व का सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देष है। इसका 80 प्रतिषत तेल आयात मलक्का जलसंधि से होकर गुजरता है। अगर मलक्का जलसंधि लम्बे समय के लिए बाधित होती है तो चीन के लिए सबसे ज्यादा आर्थिक और भयावह स्थिति पैदा हो सकती है। एक हफ्ते के लिए बाधित मलक्का जलसंधि का मतलब लगभग 65 मिलियन डाॅलर अधिक खर्चे का हो सकता है।

किन्हीं कारणवष अगर सुन्दा और लोम्बोक जलसंधियां भी बाधित हो जाती हैं तो समुद्री जहाजों को आॅस्ट्रेलिया के दक्षिण से होकर फिलिपिंस समुद्र में आना होगा जो लगभग प्रतिमाह 3 बिलियन डाॅलर का अतिरिक्त खर्चा पैदा करेगा। अगर मलक्का जलसंधि क्षेत्र युद्ध प्रभावित घोषित होता है तो बीमा दरें बहुत अधिक बढ़ जायेंगी जो वैष्विक देषों को वैकल्पिक समुद्री रास्ते लेने के लिए बाध्य कर देंगी। 2008 में जब ईडन की खाड़ी को युद्ध प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया था तो बीमा दरें 20,000 डाॅलर से बढ़कर 1,50,000 डाॅलर हो गई थी। चीन के लिए विषेष तौर पर यह आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महंगा पड़ेगा।

इस क्षेत्र में स्थिति विस्फोटक हो चुकी है। एक छोटी सी गलती युद्ध में बदल सकती है। चीन के पास एक सषक्त नौसेना है परंतु उसके इरादों को नाकाम करने के लिए भारत जापान आॅस्ट्रेलिया और अमेरिका की नौसेनाएं क्वाॅड गठबंधन में जुटकर लगातार युद्धाभ्यास कर रही हैं। भारत अपने अण्डमान और निकोबार द्वीप समूहों से सामरिक तौर पर इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। क्वाॅड देषों द्वारा चीन पर षिकंजा कसा जा चुका है, देखना सिर्फ यही है कि पूर्व की भांति हम बिना किसी सकारात्मक नतीजे के इस षिकंजे को ढीला ना कर दें। लम्बी बातचीत के जरिए इस प्रकार के षिकंजों से निकलने के लिए चीन मषहूर है। 

– कर्नल डाॅ. भारत भूषण वत्स (से.नि.)

One Comment:

  1. Very informative

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