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भारत चीन की कहानी – कर्नल बी बी वत्स की जुबानी – 10

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दक्षिण चीन सागर- सामरिक दृष्टि

पैरासल और स्र्पाटले द्विपसमूह दक्षिण चीन सागर के दक्षिण और पूर्व में स्थित है। ये दोनों द्विप छोटे-छोटे द्विपसमूहों से मिलकर बने हैं जिनपर आसपास के देषों के अलावा चीन भी अपना हक जमाता रहा है। सामरिक दृष्टि से पैरासल और स्र्पाटले द्विपसमूह दक्षिण चीन सागर में प्रवेष और निर्गम को नियंत्रित करते हैं।

इसके अलावा वैष्विक समुद्री कानून के अनुसार तट से 200 किमी के समुद्री क्षेत्र पर किसी भी देष का अधिकार विषिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ई.ई.जेड.) के रूप में होता है। इसी कारण से चीन समेत यहाँ के अन्य सभी देष इन द्विपसमूहों पर अपना अधिकार जमाते हैं। मजे की बात तो यह है कि सभी पर्यावरण के कानूनों को दरकिनार करके चीन ने इस इलाके पर अपनी प्रभुसत्ता कायम करने के लिए सात कृत्रिम द्विप भी बना लिये हैं।

इन द्विपों पर चीन ने लड़ाकू जेट हवाई जहाजों को उतरने के लिए हवाई पट्टी, एयर डिफेंस तोपें और मिसाइल्स इत्यादि तैनात की हुयी हैं। अब तो चीन ने अपने देष वासियों को इन कृत्रिम द्विपसमूहों पर पर्यटन के लिए सप्ताहांत पर जाने की इजाजत भी दे दी है।

2016 में इंटरनेषनल कोर्ट द्वारा एक ऐतिहासिक फैसला दिया गया कि दक्षिण चीन सागर में चीन का कोई अधिकार नहीं है। चीन की हिमाकत तो देखिये की चीन के खिलाफ और फिलिपिंस के पक्ष में दिये गए इस फैसले को चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी बताते हुए इस फैसले को मानने से ही इनकार कर दिया।

चीन यू.एन. को कितनी तवज्जो देता है इसकी यह एक बानगी है। हमारी तरह डोजियर पर डोजियर यू.एन. को पेष नहीं करता है। दक्षिण चीन सागर में चीन ने अपनी हेकड़ी दिखाते हुए यह फरमान जारी किया हुआ है कि इस इलाके से गुजरने वाले हर जहाज को चीनी नौसेना को अपनी पहचान बताने के बाद ही गुजरने दिया जायेगा। हालांकि अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट केरियर्स की मौजूदगी में इस बचकाने फरमान को कोई नहीं मानता है।

भारत को इस इलाके में पूर्वी विष्व के देषों के साथ मिलकर चीन के मुकाबले अपनी मौजूदगी दिखानी होगी। अमेरिका आज भारत का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। जरूरत पड़ने पर हमें तटस्थता की नीति को दरकिनार करके अपने सहयोगियों अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया, वियतनाम और ताइवान जैसे देषों का साथ देना होगा।

हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि चीन की युद्ध लड़ने की क्षमता को हम जितना महंगा कर सकते हैं हमारे लिए यह नीति उतनी ही लाभकारी होगी। अमेरिका और सहयोगी देषों की नौसेना के मुकाबले आज चीन को मजबूरन दो एयरक्राफ्ट केरियर्स और अनेक जंगी समुद्री जहाज दक्षिण चीन सागर में तैनात करने पड़ रहे हैं। पर इस तैनाती की आर्थिक कीमत चीन कितने दिन तक बर्दाष्त कर पायेगा यह चीन भी जानता है और हमें इसका फायदा उठाना चाहिए।

इससे आर्थिक रूप से कमजोर होकर चीन को अपनी महत्वकांक्षी परियोजनाओं जैसे बेल्ट रोड़ इनिषिएटिव (बी.आर.आई.), सीपैक और सेनाओं का आधुनिकीकरण कार्यक्रम को या तो धीमे करना होगा या फिर बिल्कुल बंद करना होगा। क्वेड यानि अमेरिका भारत जापान और आस्ट्रेलिया का जो संगठन 2019 में बनाया गया है उसे हमें चीन की लगाम कसने के लिए और ज्यादा प्रभावषाली बनाना होगा।

दक्षिण चीन सागर के छोटे देषों को अपनी मौजूदगी से सुरक्षा महसूस करानी होगी वरना अप्रैल 2020 में वियतनाम के मछली पकड़ने वाले जहाज को चीन द्वारा डूबोने की हरकतें होती रहेंगी।

जितना ज्यादा दबाव हम चीन पर दक्षिण चीन सागर में रखेंगे उतना ही चीन का दबाव अन्य क्षेत्रों पर कमजोर रहेगा। हमें वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के दबाव को कम करने के लिए हमारी मजबूत नौसेना की मौजूदगी दक्षिण चीन सागर में सामरिक दृष्टि से रखनी बहुत जरूरी है।

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