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भारत चीन और पी.ओ.के. – कुछ सम्भावनाएं- कर्नल डाॅ. भारत भूषण वत्स (से.नि.)

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पाकिस्तान के करांची शहर के नजदीक ग्वादर पोर्ट से, अरब सागर में पहुँच कर अफ्रिका और पष्चिमी एषिया के देषों में अपना तैयार माल पहुँचाने के लिए और वहाँ से सस्ता कच्चा माल लाने के लिए 2013 में चीन ने चाईना पाकिस्तान इकाॅनोमिक काॅरिडोर (सीपैक) की योजना बनाई हुई है। सीपैक सड़क और रेल परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा प्रोजेक्ट्स और स्पेषल इकाॅनोमिक जोन्स से सज्जित योजना है। लगभग 65 बिलियन डाॅलर के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में चीन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

India China and POK 2

India China and POK

झिंनजियंाग प्रांत से शुरू होने वाली सीपैक परियोजना शुरू में ही पी.ओ.के. के गिलगित बाल्टीस्तान से होकर गुजरती है। पाकिस्तान के अन्य प्रांतों से होकर सीपैक फिर बलूचिस्तान से गुजरती है जहाँ आजादी के दीवाने बलूचों ने पाकिस्तान सेना के साथ-साथ सीपैक पर काम कर रहे चीनी कर्मचारियों की भी नाक में दम कर रखा है। जबसे हमारे गृह मन्त्री श्री अमित शाह ने संसद में छाती ठोककर पी.ओ.के. को वापिस लेने की मंषा जाहिर की है तब से चीन की नींद हराम है। हो भी क्यों न, अगर गिलगित बाल्टिस्तान, शक्सगाम घाटी और अक्साई चीन हमारे पास वापिस आ जाता है तो सीपैक के साथ-साथ झिंगजियांग प्रांत को तिब्बत आॅटोनोमस रिजन में ल्हासा से जोड़ने वाली जी-219 हाइवे पर भी भारत की दखलअंदाजी हो जायेगी। अगर ऐसा हुआ तो हो सकता है कि झिनजियांग प्रांत और कब्जाया हुआ तिब्बत चीन के हाथों से निकल जाए।

चीन पाकिस्तान ने भारतीय हवाई सेना की क्षमता को बालाकोट में अच्छी तरह से जान लिया है। इसलिए ही चीन ने पी.ओ.के. के गिलगित बाल्टिस्तान में अपनी एयर डिफेंस मिसाइल्स और स्कार्दू इलाके में अपने फाइटर जेट्स तैनात किये हैं। वह युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान सेना को नियंत्रण रेखा और अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सेना की शक्ति दो हिस्सों में बांटने के लिए प्रेरित करेगा। पी.ओ.के. मंे पहले से ही तैयार प्रषिक्षित आतंकवादियों को कष्मीर और उससे लगे इलाकों में भेजकर आंतरिक स्थिति को भी कमजोर करने की कोषिष करेगा। हमें श्रीलंका द्वारा चीन को लीज पर दिये हरमनटोटा पोर्ट और नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार की तरफ भी ध्यान रखना होगा। गौरतलब रहे कि हमारे देष के भीतर कुछ संवेदनषील इलाके भी हैं जहाँ कि स्थिति को देषद्रोहियों और बाह्य शक्तियों द्वारा बिगाड़ा जा सकता है।

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साउथ चाइना समुद्र में आॅस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका और भारत (क्वाड) की नौसेनाएं जोर-षोर से युद्धाभ्यास कर रही हैं। अमेरिका का रोनाल्ड रीगन एयरक्राफ्ट कैरियर अण्डमान निकोबार के पास पहुँच चुका है जहाँ से चीन की नब्ज, मलक्का जलसंधि, को कभी भी ब्लाॅक किया जा सकता है। याद रहे मलक्का जलसंधि से चीन का अधिकतर सामान और तेल गुजरता है। चीन की नौसेना भी कम नहीं है। सामरिक आंकलन में कोई एक अकेला देष चीन की नौसेना का सामना कम समय में सफलतापूर्वक नहीं कर पायेगा। इसलिए जरूरी है कि चीन से त्रस्त देष एकजुट होकर उसे सबक सिखाएं। क्वाड इस दिषा में एक सही कदम है। चीन भी क्वाड की क्षमता को पहचान रहा है। भारत चीन युद्ध चाहे वह पूर्वी लद्दाख या अरूणाचल के इलाकों में सीमित युद्ध हो या साउथ चाइना समुद्र तक फैला एक सम्पूर्ण युद्ध हो, दोनों ही परिस्थितियों में पाकिस्तान का चीन के पक्ष में आना लाजमी है।

ऐसी परिस्थितियों में क्या हम इसे एक सुनहरा मौका मानकर पी.ओ.के. को वापिस भारत का हिस्सा बना सकते हैं? मेरी नजरों में ऐसा संभव है। भारतीय सेना निष्चित रूप से दो या ढाई मोर्चों पर सम्भावित युद्ध के लिए तैयारी कर रही है और सक्षम भी है। पिछले दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पी.ओ.के. के सदर को एक गद्दार बोला है और जवाब में सदर ने इमरान खान के सामने न झुकते हुए चुनौती दी है कि अगर इस्लामाबाद जाउंगा तो खुले हाथ नही बल्कि हथकड़ियों में जकड़कर जाना पसन्द करूंगा।

यह घटना भारत के लिए कुछ महत्वपूर्ण मौकों की तरफ इषारा कर रही है। पी.ओ.के. की आम जनता के और हुकमरान भी अब इमरान खान सरकार के खिलाफ हैं। हमें एक कष्मीर के नारे को आगे बढ़ाना होगा और ऐसी परिस्थितियां पैदा करनी होगी कि जब भारतीय सेना मुज्जफराबाद या सर्कादू की तरफ कूच करे तो स्थानीय लोग बांग्लादेष की तरह उसका स्वागत करके हर प्रकार की मदद करें। हमारा काम काफी आसान हो सकता है हालांकि समय कम है, काम कठिन है परंतु निष्चित तौर पर संभव है। इस एक तीर से हम अपने पी.ओ.के. को वापिस लेने के साथ-साथ चीन को भी घुटनों पर ला सकते हैं। चीन पी.ओ.के. और पाकिस्तान में सीपैक के जरिए इतना निवेष कर चुका है कि अब उसे अपना कदम पीछे हटाना नामुमकिन है।

– कर्नल डाॅ. भारत भूषण वत्स (से.नि.)

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