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भारत चीन की कहानी – कर्नल बी बी वत्स की जुबानी – 8

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खारे पानी की पैंगोंगसो झील लेह से 157 किमी और 5 घंटों की दूरी पर स्थित है। इस इलाके का सौंदर्य न केवल भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है बल्कि दुनियां के तकरीबन हर देष के पर्यटक यहाँ आकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यही पैंगोंगसो झील और उसके आसपास के इलाके पर चीन अपनी नजरें गड़ाकर हड़पने का इरादा दिखा रहा है। 235 किमी लम्बी पैंगोंगसो झील की अधिकतम चैड़ाई 5-6 किमी है। इसका लगभग 80 किमी का पष्चिमी इलाका ही हमारे पास है जबकि दो तिहाई हिस्सा चीन के नियंत्रण में है।

इस झील के उत्तरी भाग में पहाड़ों की चोटी से आठ पर्वत स्कन्ध जिसे मानचित्रकारों की भाषा में स्पर और स्थानीय लोगों की भाषा में फिंगर्स कहते हैं, पैंगोंगसो झील की तरफ उतरते हैं। भारत की तरफ से शुरू होकर फिंगर एक से आठ फिंगर्स चीन की तरफ जाती है। चूंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा जमीन पर भलीभांति परिसिमित नहीं है इसलिए दोनों देशों का सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाकों पर अपना-अपना अलग दृष्टिकोण रहता है। हमारी दृष्टि में वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर आठ के उत्तरी इलाके से गुजरती है और इसलिए फिंगर आठ तक का पूरा इलाका हम अपना मानते हैं।

अप्रैल 2020 तक हमारी पेट्रोल्स फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग भी करती रही हैं। परंतु चीन का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर 2 से गुजरती है और वहाँ तक का इलाका उसका है। फिंगर 4 के एकदम नीचे पष्चिमी दिषा में हमारी आई.टी.बी.पी. का कैम्प बना हुआ है। यहाँ यह बताना जरूरी है कि इन आठों फिंगर्स में से सबसे महत्वपूर्ण और ऊँची फिंगर 4 है। इसकी अहमियत इसी बात से लगायी जा सकती है कि फिंगर आठ की तरफ से सिर्फ फिंगर चार तक देखा जा सकता है और फिंगर एक की तरफ से भी सिर्फ फिंगर 4 तक का ही इलाका नजर आता है जबकि फिंगर चार पर बैठा सैनिक फिंगर एक और आठ दोनों को देख सकता है। अब यह बात समझ से परे है कि जब फिंगर चार इस इलाके की सबसे ऊँची और महत्वपूर्ण फिंगर है तो हमने अपना आई.टी.बी.पी. कैम्प फिंगर चार के ऊँचे इलाके में बनाने की बजाय नीचे वाली जगह पर क्यों बनाया ?

पैंगोंगसो झील के दक्षिणी इलाके में स्पैंगुर सो नाम की एक छोटी झील है। यहाँ थाकुंग और चुषुल नाम के दो गांव हैं। नजदीक में चुषुल की इस्तेमाल न की जाने वाली एयरफिल्ड है और मुख्य चोटियों में हेलमेट टाॅप, ब्लैक टाॅप, गुरूंग हिल, मगर हिल है। गुरूंग और मगर हिल्स के बीच स्पैंगुर गैप है जो सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

29-30 अगस्त 2020 की रात को जब चीन की पी.एल.ए. ने इन चोटियों पर कब्जा करने की कोषिष की तो भारतीय सेना ने उनसे ज्यादा तेज गति से कार्यवाही करते हुए इन सभी चोटियों पर अपना कब्जा कर लिया है। चीन के सैनिकों को यह कतई उम्मीद नहीं थी, मगर हमने भी इस कार्य के लिए तिब्बतीज जवानों की स्पेषल फ्रंटियर फोर्स का इस्तेमाल कर ईंट का जवाब पत्थर से दिया। इस कार्यवाही से आज हम स्पांगुर गैप के दोनों छोरों पर बैठे हैं, सभी ऊँची पहाड़ियों पर हमारा कब्जा है और चीन की सेना हमारे ठीक नीचे वाली पहाड़ियों पर है।

मजे की बात तो यह है कि चीन का इस इलाके में स्थायी रूप से स्थापित मोल्डो कैम्प अब हमारे सीधे फायर के नीचे आ गया है। इन तकरीबन 20 दिन में हमने अपने डिफेंसेस को इतना मजबूत और ताकतवर बना लिया है कि चीन लाख चाहने पर भी हमसे यह इलाका वापस नहीं ले सकता है, बषर्ते एक बार फिर हम कहीं वार्तालाप की मेज पर न हार जायें।

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